शेखी का परिणाम (Result of Boasting)

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Short story of three friends who like boasting. One friend Riese gets into big trouble due to his such nature.

Full Story in Hindi

अनोवा और ग्रीट्स बहुत पक्के मित्र थे। वे एक दूसरे पर जान छिड़कने को तैयार रहते थे। उन्हीं दिनों उनको मोरियो नामक एक व्यक्ति मिला। वह भी उन लोगों से मित्रता बढ़ाने लगा। एक बार वे किसी पार्टी में एक साथ गए। वहां भोजन करते समय मोरियो को न जाने क्या सूझा कि वह जोर-जोर से बातें करने लगा। उसकी तेज आवाज सुनकर लोग उन तीनों की ओर देखने लगे।

तभी मोरियो शान में आकर शेखी बघारने लगा। वह बोला – ‘मैं जहां रहता हूं, वह एक अद्भुत मकान है। उस मकान के एक कमरे में चिल्लाने पर दूसरे कमरे में उसकी गूंज सुनाई देती है।’

अनोवा ने आश्चर्य प्रकट करते हुए पूछा – ‘अच्छा! एक कमरे में बोलने की गूंज दूसरे कमरे में सुनाई देती है। यह कैसे संभव है?’

मोरियो बोला – ‘अरे ये गूंज भी ऐसी-वैसी नहीं होती, पूरी दस बार सुनाई देती है। आप मेरा नाम पुकार कर देखें, दूसरे कमरे मेें दस बार मेरे नाम की गूंज सुनाई पड़ेगी।’

‘अच्छा!’ सभी आश्चर्य चकित होकर बोले। उसी पार्टी में एक रईस व्यक्ति मौजूद था। उससे मारियो की शेखी बरदाश्त नहीं हो रही थी। इसके अतिरिक्त रईस को यह भी अच्छा नहीं लग रहा था। कि पार्टी के सभी लोग उसकी ओर ध्यान न देकर एक फटीचर की बातों की ओर ध्यान दे रहे हैं। वह मोरियो से बोला – ‘तुम्हारे यहां दस बार गूंज सुनाई देती है, तो इसमें आश्चर्य की क्या बात है। मेरी हवेली में तो यह गूंज बीस बार सुनाई देती है।’

सभी लोग मारियो कि बात छोडकर रईस की बात सुनने लगे। उनका ध्यान रईस की ओर चला गया। इससे रईस को बहुत खुशी महसूस हुई।

इतने में अनोवा बोला – ‘यह संभव नहीं कि एक आवाज की बीस गूंज सूनाई दें।’

रईस ने कहा – ‘क्यों संभव नहीं है? आप नहीं जानते कि मेरी हवेली कितनी पुरानी है? उसमें आवाज की गूंज बीस बार सुनाई देती है। आप चाहें तो मेरे यहां आकर स्वयं आजमाकर देख सकते हैं।’

सभी लोग आगे बढ़कर आने लगे कि हम भी गूंज को आजमाना चाहते हैं। अब रईस बेचारा मुसीबत में फंस गया। उसने सोचा भी न था कि लोग इस तरह गूंज सुनने व आजमाने को राजी हो जाऐंगे। लेकिन अब वह लोगों को आने से रोक नहीें सकता था।

अनोवा व ग्रीट्स ने कहा – ‘आप बताइये हम लोग आपके यहां कब आ सकते हैं?’

रईस ने अगले शाम सभी को आने की स्वीकृती दे दी। रईस मन ही मन बहुत परेशान था। कि अब उसकी बहुत बेइज्जती होगी, जब लोग उसकी हवेली पर आऐंगे और अपने आवाज की एक भी गूंज नहीं सुन सकेंगे। उसने अपनी परेशानी अपनी पत्नी को वताई। दोनों ने मिलकर सलाह कि और एक योजना बना डाली।

रईस ने अपने पुराने नौकर पियरो को बुलाया और सारी योजना समझा दी। योजना के अनुसार पियरो को दूसरे कमरे के पास बनी कोठरी में छिप जाना था और रईस के आवाज देने पर बीस बार आवाज क गूंज निकालना था।

नियमित समय पर लोग रईस कि हवेली पर पहुॅच गये। अनोवा व ग्रीटस भी गूंज को आजमाने पहुंचे थे। रईस ने आवाज दी – ‘अनोवा, अनोवा।’उधर से आवाज की गूंज बीस बार सुनाई दी।

‘अनोवा, अनोवा, अनोवा……।’ लोग बीस गूंज सुनकर हैरत में पड़ रहे थे। सभी लोग गूंज को आजमाने के लिये एक दूसरे के नाम पुकार रहे थे।

संयोग से एक व्यक्ति का नाम पियरो था। उसका मित्र उसके साथ गूंज का आनंद लेने आया था। उसके मित्र ने गूंज सुनने के लिये जोर से आवाज दी-पियरो, पियरो, तुम कहां हो?’

इस बार गूंज के स्थान पर आवाज सुनाई दी – ‘हुजूर में यहां हूँ, अभी आता हूं।’

इतने में कोठरी में छिपा पियरो बाहर निकल आया। रईस बेचारा परेशान था। कि यह गड़बड़ कैसे हो गई। लेकिन शोर शराबे में लोगों को कुछ पता नहीं लगा कि ये क्या हुआ। लोगों को इस बार यह महसूस हुआ कि इस बार गूंज नहीं सुनाई दी। इसी बीच अनोवा ने आवाज लगाई – ‘ग्रीटस, ग्रीटस्।’ लेकिन कोई आवाज या गूंज नहीं सुनाई दी। अब लोगों को समझ में आ गया। लोग क्रोधित होकर रईस की ओर बढ़े। अनोवा क्रोध में बोला – ‘लोगों को बेवकूफ बनाते शर्म नहीं आती?’

वह और ग्रीट्स क्रोध में रईस को पीटने की सोचने लगे। तभी रईस ने माफी मांगते हुए कहा – ‘माफ कीजिये, मैंने आप लोगों से झूठ बोला है और आप लोगों को धोखा दिया है। मैं इसके लिये शर्मिन्दा हूं । आप मुझे माफ कर दीजिये।’

लोग रईस का मजाक उड़ातेे हुए हवेली से बाहर चले गए। रईस ने मन ही मन निश्चय किया कि वह कभी झूठी शेखी नहीं बघारेगा। आज इसी शेखी के कारण इतनी बेइज्जती हुई थी और वह पिटने वाला था।

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