बातों का फेर (Roger win 3 cattles in challenge)

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A Russian folk tale in which a kid first boast of dining with ruthless village landlord and then enters into a challenge with his friend for doing the same again. Rest of the story is how he uses his brain to dine with village landlord to win 3 cattles in the challenge.

Complete Short Story in Hindi

गांव के किसान के बेटे की शादी का मौका था। घर में खूब रौनक हो रही थी। स्त्रियां घर में खुशी के गीत गा रही थीं। बाहर चबूतरे पर घर के तथा गांव के अनेक लोग जमा थे।

खूब हंसी-मजाक का माहौल था। सब अपनी-अपनी बातें सुना रहे थे और हंस रहे थे। इस बीच गांव का एक दुकानदार शेखी बघारते हुए बोला – “जानते हो कल क्या हुआ?”

सब ने पूछा – “क्या हुआ?”

“मेरी मुलाकात गांव के जमींदार ठाकुर से हुई। ठाकुर साहब ने मुझसे मेरे हाल-चाल पूछे।” दुकानदार बोला।

सारे लोग कहने लगे – “ऐसा तो हो ही नहीं सकता। ठाकुर एक नंबर का घमंडी और खूसट है। किसी से सीधे मुंह बात नहीं करता।”

उन सबकी बातों को किसान का अठारह वर्षीय बेटा रोजर सुन रहा था। वह बोला – “अरे चाचा, तुम तो मुलाकात की बात करते हो, मैं तो ठाकुर के साथ भोजन करके आ सकता हूं।”

सब लोग सुनकर हंसने लगे। फिर एक बुजुर्ग समझाने लगा – “बेटा सोच-समझकर अपनी हैसियत से बात करते हैं। ऊंचे-ऊंचे ख्वाब नहीं देखा करते। हमारी इतनी हैसियत कहां है कि वह ठाकुर के दर्शन भी कर सकें।”

रोजर हंसने लगा। वह बातों में सबसे आगे था और बुद्धिमान भी था। अपना गुस्सा दबाते हुए बोला – “दादा जी, मैं कोई गप्प नहीं हांक रहा हूं, सच कह रहा हूं।”

दुकानदार रोजर की बात सुनकर मन मन खिसियाने लगा। अपना गुस्सा दबाते हुए बोला – “बेटा रोजर, तुमने अगर ठाकुर के घर भोजन करके दिखा दिया तो मैं तुम्हें बड़ा इनाम दूंगा। ज्यादा सपने नहीं देखा करते बच्चे।”

“अच्छा, क्या बड़ा इनाम दोगे? अपने दोनों घोड़े मुझे दे दोगे?” रोजर बोला।

“अरे दो घोड़े क्या, एक गाय भी दे दूंगा।” दुकानदार जोश में भरकर बोला, “लेकिन एक बात बताओ, अगर तुम एक दिन के अंदर ठाकुर ठाकुर के साथ भोजन नहीं कर सके तो तुम मुझे क्या दोगे?”

“ठीक है, मै तीन वर्ष तक तुम्हारी गुलामी करूंगा।” रोजर बोला।

सब लोग रोजर की तरफ देखने लगे। रोजर ने असंभव को सभंव करने जैसी बाते कही थी।

अगले दिन सुबह रोजर ठाकुर के यहां पहुंचा तो द्वारपाल ने रोक लिया। रोजर ने उससे कहा – “ठाकुर साहब से पूछकर बताओ कि सोने की ईंटों के बारे में कुछ पूछना है। कहो तो कहीं और जाकर पूछ लू।”

द्वारपाल ने ठाकुर को सारी बात बताई तो ठाकुर सुनकर मन ही मन जिज्ञासु हो उठा। परंतु ऊपर से शांत रहकर बेला – “लड़के को अंदर ले आओ, उसके साथ भोजन आदि का प्रबंध करो।”

रोजर को इज्जत के साथ भीतर ले जाया गया। वहां मेज पर भोजन और फल लगा दिए गए। थोड़ी देकर में ठाकुर आकर रोजर के पास बैठ गया और पूछने लगा – “तुम्हारा क्या नाम है? तुम्हारे पिता क्या कामकरते हैं?”

रोजर बोला – “मेरा नाम रोजर है। मेरे पिता किसान हैं। मैं पूछ रहा था कि सोने की एक ईंट की कीमत क्या होगी?  उसके बदले में क्या-क्या खरीदा जा सकता है?”

ठाकुर की जिज्ञासा बढ़ती जा रही थ। वह वोला – “सोने की ईंट की कीमत तो हजारों में होगी। तुम चाहो तो उसके बदले में जमीन-जानवर, बहुत कुछ मिल सकता है। वैसे तो ईंट के वजन पर निर्भर करता है कि ईंट की कीमत क्या है? ईंट देख लूं तो पता चले। बोलो कितनी ईंटें हैं तुम्हारे पास? एक या ज्यादा? जाओ जल्दी से ले लाओ। मैं अच्छे दाम दूंगा।” ठाकुर ईंट पाने की लालसा में लगातार बोलता जा रहा था और साथ ही अंगूर खाता जा रहा था।

रोजर चुपचाप बैठा भोजन कर रहा था। ठाकुर को लगा कि शायद रोजर को ईंटों की कीत कुछ कम लग रही है अतः वह प्यार से बोला – “अरे बेटा, जो चाहोगे सो मिल जाएगा। जितनी जमीन चाहिए उतनी जमीन दे दूंगा, जाओ अपनी ईंट ले आओ।”

रोजर बोला – “परंतु मेरे पास सोने की ईंट हैं थोड़े ही, मैं तो यूं ही ईंटों का भाव पूछ रहा था। अगर कल मेरे पास ये ईंटें हों…।”

“भाग यहां से बदमाश, मुझे बेवकूफ बनाता है?” कहकर ठाकुर ने अपने सिपाहियों को जोर से आवाज लगाई।

“अरे आप तकलीफ क्यों करते हो, मैं स्वयं ही चला जाता हूं।” रोजर बोला – “आप मुझे क्या जमीन-जानवर दोगे? मुझे तो इस भोजन के बदले ही दो घोड़े और एक गाय मिलने वाली है।”

जमींदार ठाकुर हत्प्रभ होकर बाूतनी रोजर को जाते हुए देख रहा था।

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