बातूनी (Lazy Reyms gets a good Job)

  1. Previous
  2. Next
  3. Recent

    1. Signs 'He' May be Cheating on You
    2. 7 Vows of Hindu Marriage - Know What 'Saat Vachans' Mean
    3. RuPay vs Visa vs Mastercard vs American Express- A Comparison
    4. What is RuPay? Everything You Need to Know About India's Domestic Payment System!
    5. Top 10 Online Portals to Find a High Paying Job in India
    6. Top Indians who Revolutionized the IT Sector in India
    7. 8 Initiatives by Narendra Modi that Could Change the Future of the Nation
    8. 8 Work-from-home Jobs for Housewives, Students, and Part timers
    9. Complete Company Registration Process in India - Explained
    10. Change Name in India in 5 Steps - Filing Affidavit, Newspaper Ad & Gazette Notification

Reyms is a talkative guy who is lazy and worthless. He impresses king with his talks and gets a good job and prosperous life. Its an Egyptian short folk tale

Moral of the Story: Every talent has its Use.

Full Story in Hindi

किसी गांव में एक लड़का रहता था। उसका नाम था रेम्स। रेम्स अत्यंत बातूनी लड़का था। वह अपनी बातों से अक्सर लोगों को प्रभावित कर लेता था।

hindi story for kids with moralरेम्स जितना बातूनी था, उतना ही आलसी और कमजोर था। उसके बाप-दादा ने उसके लिए अपार खन-दौलत छोड़ी थी। इस कारण उसे कमाने की कोई चिंता न थी।

रेम्स दिल खेलकर खर्च करता था और दिन-रात इधर उधर घुमने में समय बिता देता था। खुले हाथ के खर्च के कारण उसके अनेक मित्र बन गए थे, जो मौके का लाभ उठाकर मुफ्त का आनंद उठाते थे।

जैसे बूंद-बूंद पानी गिरने से मटका खाली हो जाता है। उसी तरह खर्च करते-करते रेम्स की धन-दौलत समाप्त होने लगी। धीरे-धीरे उसके दोस्त उससे आंखें चुराने लगे। अब रेम्स के पास कुछ नहीं बचा था। उसका कोई मित्र उसकी सहायता करने को तैयार नहीं था।

रेम्स काम की तलाश में इधर-उधर भटकने लगा। एक दिन वह राजा के दरबार में पहुंच गया और राजा से कोई नौकरी देने की प्रार्थना की।

राजा ने कहा- ”तुम हमारे लिये क्या काम कर सकते हो?’’

रेम्स को यूं तो कुछ काम करना नहीं आता था, परंतु बातें बनाने तथा गप्पे हांकने में उस्ताद था। वह तुरंत हजिर-जवाबी के साथ बोला-’’जो काम आपके किसी आदमी से न हो, वह काम रेम्स कर दे। आप आजमाऐं तो हुजूर।’’

राजा को लगा कि यह आदमी बहुत होशियार है। देखने में जितना सीधा-सादा है, बातचीत और अक्लमंदी में उतना ही चतुर जान पड़ता है। वह सोचने लगा कि यह आडे़ वक्त में खूब काम आएगा।

यही सोचकर राजा ने रेम्स को नौकरी पर रख लिया। रेम्स को अच्छे ओहदे पर रखा गया था। इस कारण प्रतिदिन एक सोने का सिक्का देना तय किया गया।

रेम्स बहुत खुश था कि उसे इतनी अच्छी तनख्वाह मिलती है। वह पूरे राजसी मेहमानखाने से अपना मनपंसंद भोजन करने लगा और राजमहल में ही एक कमरे में रहने लगा।

जब कभी रेम्स का मन होता, वह अन्य कर्मचारियों व पहरेदारों के काम की निगरानी कर आता। एक दो लोगों को आलसी कहकर डांट लगा आता फिर अपने कमरे में आराम करने लगता।

राजा के इतने बड़े राजमहल में ढेरों कर्मचारी थे। इस कारण कौन काम कर रहा है। और कौन मुफ्त में तनख्वाह ले रहा है। राजा को पता ही नहीं लग पाता था।

रेम्स के दिन बहुत मजे में कट रहे थे। एक दिन पड़ोसी राजा ने उस देश पर आक्रमण कर दिया। राजा ने भी उस पड़ोसी राजा का मुकाबला करने के लिए अपनी फौज भेजी।

परंतु राजा के सिपाही मरने लगे क्योंकि वे पड़ोसी राजा का मुकाबला करने में असमर्थ थे। राजा ने अपने मंत्रियों से मंत्रणा की कि उस शत्रु देश की सेना का मुकाबला किस प्रकार किया जाए? पर किसी भी मंत्री को इसका उपाय नहीें सूझ रहा था।

राजा सोच में डूबा था। तभी उसे रेम्स की याद हो आई, जिसने कहा था कि जो काम कोई न कर सके वह काम रेम्स कर दे। राजा ने रेम्स को बुलवा भेजा।

रेम्स तुरंत राजा व मंत्रियों की सभा में हाजिर हुआ।

राजा ने कहा-’’रेम्स तुमने कहा था कि जो काम कोई न कर सके, वह काम रेम्स कर दे, क्या तुम्हें याद है?’’

’’जी हुजूर, बिल्कुल याद है। ’’रेम्स बोला।

“तो अब एक काम तुम्हें करना होगा।” राजा ने कहा।

रेम्स हंसते हुए बोला-’’आप काम तो बताइए, मैं चुटकियों में कर दूंगा।“

राजा कुछ मिनट रुका, फिर बोला-’’तुम जानते ही होगे कि हमारे देश पर पड़ोसी राजा ने आक्रमण कर दिया है। हमारी छोटी-सी सेना इतनी बड़ी सेना का मुकाबला नहींे कर पा रही है। तुम्हें किसी प्रकार इस युद्ध को रोकना होगा।

रेम्स भीतर ही भीतर घबरा उठा। उसे समझ में नहीं आया कि वह राजा को किस प्रकार संतुष्ट करे? परंतु ऊपर से हंसता हुआ बोला-’’महाराज! मैं पड़ोसी राजा की सेना के छक्के छुड़ा दूंगा। अपनी तलवार यूं घुमाऊंगा कि दुश्मनों की गर्दन धड़ से अलग हो जायेगी।“

राजा ने आश्चर्यचकित होते हुए पूछा-’’क्या तुम युद्ध की विद्या भी जानते हो?“

रेम्स पहले दर्जे का गप्पी तो था ही, तुरंत बात बनाते हुए बोला- ”अरे मैं बहुत कुछ जानता हूं। बस मुझे मौका मिलना चाहिये। अब आप देखिएगा कि मैं क्या करता हूं।“

राजा ने आश्वस्त होते हुए कहा-’’तुम्हें जो मदद चाहिये ले लो और जल्दी ही अपना कमाल दिखाओ।“

रेम्स वहां से जाकर अपने कमरे में बैठ सोच-विचार करने लगा। वह जानता था कि वह कुछ भी नहीं कर सकता था, वह सिर्फ बातें बनाना जानता था।

उसने चुपचाप अपना सामान बांधकर एक कोने में रख दिया और खजाना मंत्री से जाकर कहा-’’मुझे राजा ने जो कार्य सौंपा है, उसके लिए एक हजार मोहरें चाहिये।’’

खजाना मंत्री ने सहर्ष ही उसे हजार मोहरें दे दीं। रेम्स खुश था कि भविष्य के लिए उसका अच्छा इंतजाम हो गया।  राजा के यहां मिलने वाली सारी मोहरे भी उसने जोड़ रखी थी।

उसने मन ही मन राजमहल से भागने की योजना बना डाली तभी उसे खयाल आया कि यहां से दूर जाते-तो तो एक-दो दिन लग जाएंगे। इतने समय में तो वह भूखा मर जायेगा।

रेम्स शाम के वक्त रसोई में पहुंचा। लेकिन भोजन का वक्त न होने के कारण वहां शाही रसोईये मौजूद नहीं थे। तभी एक रसोईये ने वहां प्रवेश किया। वह बोला-’’आपको किसी चीज की आवश्यकता हो तो बताइए।़़’’

रेम्स ने तुरंत बात बनाते हुए कहा-”मुझे शाही काम से बाहर जाना है। अतः मैं रात्रि के भोजन के समय मौजूद नहीं रहूंगा। यदि कोई भोजन आप अभी तैयार कर सकें तो……..।“

’’हां हां मैं अभी भोजन तैयार किये देता हूं। आप आधा-पौन घंटा ठहर जाइए।“ रसोइया बोला।

रेम्स सोचने लगा कि आधे घंटे में महल के दूसरे और रसोइए इधर आ जायेंगे तो उसकी पोल खुल जायेगी। अतः वह बोला-’’दोपहर के भोजन में से जो कुछ बचा हो वही दे दीजिये।

रसोईये ने देखकर बताया कि सिर्फ तीन रोटियां बची हुई हैं और एक सब्जी। रेम्स ने खुश होकर वह रोटी और सब्जी ले ली। इसके पश्चात् मौका देखकर रेम्स ने मोहरें, अपने सामान की गठरी ली और महल के पिछवाड़े से बाहर निकल गया।

रात्रि होने को थी। रेम्स को किसी ने जाते हुए नहीं देखा। वह तेज कदमों से चलता रहा-चलते-चलते जंगल में पहुंच गया। तब तक रात्रि हो गई थी। उसने एक रोटी निकाल कर खा ली और रात्री पेड़ पर बिता दी।

सुबह होते ही वह आगे के लिए चल दिया। चलते-चलते वह थक गया था, उसे प्यास भी लगी थी। रास्ते में उसने एक तालाब देखा और सोचा, कि यहीं बैठकर थोड़ा भोजन कर लूं और फिर पानी पीकर विश्राम कर लूं।

उसने पहले तालाब के पानी से प्यास बुझाई, फिर पेड़ की छांव में यह सोचकर लेट गया कि अभी थोड़ा सुस्ता लूं फिर भोजन करुंगा परंतु लेटते ही रेम्स की आंख लग गई।

काफी देर बाद रेम्स की आंख खुली तो उसे जोर की भूख लगी थी। वह अपनी खाने की पोटली खोलकर बैठ गया। उसमें केवल दो रोटियां थीं। रेम्स सोचने लगा कि यदि उसने दोनों रोटियां अभी खा लीं तो बाद में भूख लगने पर क्या खायेगा।

रेम्स सोचते-सोचते बुदबुदाने लगा एक खाऊं, दोनों को खाऊं, एक खाऊं, दोनों को खाऊं। भाग्यवश उस पेड़ पर दो परियां रहती थीं। उन परियांे ने रेम्स को बुदबुदाते हुए देखा तो वे डर गई। वे सोचने लगी कि रेम्स उन दोंनों को खाने की बात कर रहा है।

दोनों परियां झट से रेम्स के सामने आ खडी हुई और प्रार्थना करने लगी कि वह उन दोनों को छोड़ दे, बदले में बड़ा इनाम ले ले। रेम्स को पहल तो कुछ समझ में नहीं आया। उसने उनकी बातों को ध्यान से सुना तो समझ गया और बोला-’’मैं तुम दोनों की जान बख्श दूंगा, बोलो बदले में क्या दोगी?’’

एक परी बोली-’’मैं तुम्हें यह चटाई दुंगी, इस पर बैठकर तुम जहां चाहो जा सकते हो।’’

रेम्स ने तुरंत स्वीकृति दे दी क्योकि वह तो कब से रास्ता भटक रहा था, जल्द ही अपने घर पहुंचना चाहता था।

तभी दूसरी परी बोली-’’यह अंगूठी पहन लो, इसे पहन कर तुम अदृश्य हो जाओगे। इसके बाद तुम हर ताकतवर चीज का मुकाबला आसानी से कर सकोगे।“

’’रेम्स यह सुनकर खुश हो गया और दोनों चीजें ले लीं। वह चुपचाप भोजन करने बैठ गया, तभी उसने देखा कि डाकुओं ने उसे चारों तरफ से घेर लिया है। उसे कुछ न सूझा तुरंत परी की दी हुई अगूंठी पहन ली और अदृश्य होकर डाकुओं पर वार करने लगा।“

डाकू घबराकर भाग गए। रेम्स को सहसा विश्वास नहीं हो रहा था। उसने चटाई को भी आजमाने की सोची । वह चटाई पर बैठ गया। और लडाई के मैदान में पहुंचने का आदेश दिया। कुछ ही क्षणों में वह पड़ोसी राजा के साथ हो रही लडाई के मैदान में पहुंच गया।

उधर, अगले दिन सुबह राजा ने अपने सेवको को रेम्स को बुलाने भेजा ताकि लड़ाई की तैयारियों के बारे मेें जानकारी ली जा सके। सेवकों ने आकर बताया कि रेम्स गायब है और कमरे में उसका सामान भी नहीं है।

राजा क्रोधित हो उठा। तभी खजाना मंत्री ने बताया कि वह राजखजाने से मोहरें लेकर गया है। अब तो राजा समझ गया कि रेम्स भाग गया है, उसके क्रोध की सीमा नहीं रही। उसने तुरंत आदेश दिया कि रेम्स की खोज की जाए और उसे राजा के सामने पेश किया जाए।

सैनिक चारों दिशा में रेम्स की खोज करने चल दिये।

उधर रेम्स ने अदृश्य रह कर पड़ोसी राजा के सैनिकों के हथियार छीन कर मार-काट शुरु कर दी। सैनिक अदृश्य ताकत को भूत समझकर भागने लगे। पडोसी राजा ने अपने सैनिकोें से युद्ध मैदान का वर्णन सुना तो तुरंत लड़ाई छोड़ शांति का संदेश भेजा।

राजा के सैनिकों ने रेम्स को सेना के साथ नेतृत्व करते हुए लौटते हुए पाया तो वे तुरंत खुशखबरी लेकर राजा के पास पहुंचे।

राजा के पास पड़ोसी देश का शांति दूत भी रेम्स के साथ ही पहुंचा।

राजा को सारी बात सुनकर बहुत हैरानी हुई। उसने पडौसी राजा के शांति दूत से बात करने की स्वीकृति प्रदान करके उसे वापस भेज दिया। फिर रेम्स से पूछा-”तुम कहां चले गए थे, रेम्स?’’

रेम्स ने तुरन्त बात बनाते हुए कहा- ’’आपके आदेशानुसार युद्ध समाप्त कराने गया था। मैंने कहा था न कि जो काम कोई न कर सके, सो रेम्स कर दे। अब बताइए क्या आज्ञा है ?

राजा ने खुश होकर रेम्स का वेतन व पदवी बढ़ा दी। रेम्स ने पहले तो अपने गांव वापस जाने का मन बना रखा था, परंतु इतनी अच्छी नौकरी व जिंदगी भर का आराम कहां मिल सकता था, सो उसने राजा को स्वीकृति प्रदान कर दी। अब उसे भविष्य में कमाने की चिंता से मुक्ति मिल गई थी। वह चैन से राजा के महल में रहने लगा।

blog comments powered by Disqus