चम्मच का सूप (Farmer makes spoon-soup)

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Story of a farmer who stops midway on a rainy day in a hut of an elderly lady. She refuses to give him food. Rest of the story is how he applies his brain and prepares tomato soup for himself.

Moral of the Story: Use your brain, make things easier for yourself.

Complete Story in Hindi

एक बार एक किसान किसी काम से शहर गया। जैसे ही शाम होने लगी, उसे लगा कि उसे तुरंत गांव लौट जाना चाहीए। अगर देर हो गई तो अंधेरे में घर पहुंचना मुश्किल हो जाएगा। वह अपना काम अधूरा छोड़कर गांव की ओर चल दिया।

short story for kids with moralवह थोड़ी ही दूर गया था कि अचानक बादल घिर आए, ठंडी हवाएं चलने लगीं। उसने अपनी चाल तेज कर दी। परंतु कुछ ही देर में बूंदा-बांदी होने लगी। किसान ने सोचा कि अगर मैं तेज चलूं तो शायद रात होन से पहले अपने घर पहुंच जाऊंगा।

परंतु मौसम को यह मंजूर नहीं था। काली घटाओं के कारण जल्दी ही अंधेरा छाने लगा। वारिश भी तेज होने लगी। किसान ने आगे बढना ठीक नहीं समझा। आगे जंगल का खतरनाक रास्ता था, एक तो खराब मौसम ऊपर से जंगली रास्ता सोचकर किसान डर के मारे कांपने लगा।

वह एक छोटे से घर के आगे बरामदे में दुबक कर बैठ गया। परंतु ठंडी हवाओं के कारण उसे सर्दी लगने लगी। रात होते-होते उसे सर्दी के साथ-साथ भूख भी लगने लगी। उसे कोई उपाय नहीं सूझ रहा था। वह सोचने लगा कि इस समय थोड़ा-सा कुछ गरम खाने को मिल जाता तो उसकी सर्दी भी मिट जाती और भूख भी कम हो जाती।

उसने डरते-डरते घर की कुंडी खटखटाई। अंदर से बुढि़या ने दरवाजा खोला। बुढि़या उस घर में अकेली रहती थी। उसने हिम्मत करके पूछा-”तुम कौन हो? और इस तूफानी रात में मेरे दरवाजे पर क्या कर रहे हो ?“

किसान ने विनम्र होते हुए कहा-”मैं एक गरीब किसान हूं। मेरा नाम चोखे है। शहर में कुछ काम से आया था। अब बारिश के कारण यहां फंस गया हूं।“

बुढि़या हट्टे-कट्टे जवान को देखकर भीतर से घबरा गई थी। परंतु ऊपर से हिम्मत दिखाते हुए बोली-”तो मुझसे क्या चाहते हो ?“

”मां जी, मुझे बहुत सर्दी लग रही है और साथ ही जोर से भूख लगी है। अगर आप मुझे अंदर आने देंगी और कुछ खिला देंगी तो मैं आपका एहसान जिन्दगी भर नहीं भूलूंगा।“

बुढि़या ने उसे टालने की गरज से कहा- ”चोखे, मेरे पास आज खाने को कुछ नहीं है, वरना तुम्हें कुछ न कुछ जरूर खिला देती।“

चोखे को दरवाजे के सामने ही रसोई में एक चम्मच दिखाई दिया। उसने कहा- ”कोई बात नहीं मां जी, मैं चम्मच का सूप बना कर पी लूंगा। आपके घर मंे चम्मच तो है न?“

रसोई में चम्मच सामने ही पड़ा था, अतः बुढि़या कुछ बहाना न बना सकी। वह सोचने लगी मुझे तो चम्मच का सूप बनाना नहीं आता और भला चम्मच का सूप कैसे बनता है मैं भी तो देखूं। उसने किसान को भीतर आने दिया।

किसान ने चूल्हा जला दिया और सूप बनाने के लिए पतीला मांगा। फिर चम्मच को रगड़-रगड़ कर साफ किया। बुढि़या चोखे को निहार कर देखे जा रही थी।

किसान ने बड़े पतीले में पानी भर कर उसमें चम्मच डाल दिया। पानी गरम होने लगा। इस बीच किसान ने कहा- ”मां जी मेरा नाम तो चोखे है ही, मैं सूप भी बड़ा चोखा बनाता हूं।“

इतनी देर में पानी से भाप निकलने लगी। किसान बोला-”मां जी जरा-सा नमक होगा?“

बुढि़या नमक के लिए भला क्या मना करती, सो नमक का डिब्बा उठाकर किसान को दे दिया। किसान ने आधा चम्मच नमक उसमें डाल दिया और चलाने लगा।

कुछ ही मिनटों में पानी उबलने लगा। किसान ने उसे निकाल कर चखा। बुढि़या देखकर हैरान हुई जा रही थी। इतने में किसान बोला-”सूप तो बड़ा स्वादिष्ट बन रहा है, लेकिन इसमें कोई सब्जी पड़ जाती तो मजा आ जाता।“

”कौन-सी-सब्जी चाहिए, एक दो सब्जी तो मेरे पास भी हैं।“ बुढि़या बोली।

”टमाटर, लौकी, कद्दू, आलू कुछ भी चलेगा।“ किसान ने कहा।

बुढि़या ने सोचा, चलो आज नया सूप सीखने को मिल रहा है, तो उसने तीन-चार टमाटर किसान को दे दिए। किसान ने उन्हें चाकू से काट कर डाल दिया और चम्मच से दबा-दबा कर चलाने लगा।

किसान बोला-”आज तो वाकई बहुत स्वादिष्ट सूप बना लगता है। बहुत अच्छी खुश्बू आ रही है। मैं अभी आपको चखाता हू।“

बुढि़या मन ही मन खुश होने लगी कि आज उसने चम्मच का सूप बनाना सीख लिया है। किसान ने थोड़ा-सा सूप चम्मच में निकाला फिर बुढि़या से बोला-”माँ, जी अगर आप इसे चखने से पहले चुटकी भर चीनी डाल लेंगी तो आपको अधिक स्वादिष्ट लगेगा।“

बुढि़या ने चोखे का मतलब समझ लिया कि इसे सूप में डालने के लिए चम्मच भर चीनी चाहिए और किसान ने चीनी सूप में डाल दी। फिर किसान ने चम्मच से सूप को दो कटोरी में डाल दिया। वह बुढि़या से बोला-”देखिए चम्मच का सूप कितना चोखा बना है।“

बुढिया ने सूप चखा तो दंग रह गई। बोली-”आज तक मैंने चम्मच का सूप न कभी सुना, न चखा, परंतु यह तो वास्तव में बहुत स्वादिष्ट है।“

बुढि़या और किसान बैठकर गर्म सूप का आनंद लेने लगे। उनके पास से सर्दी कब की उड़न-छू हो चुकी थी।

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